श्रीकृष्ण क्या कहते हैं?
गीता के अध्याय 6, श्लोक 5 में कहा गया है—
“उद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादयेत्।
आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः॥”
अर्थात मनुष्य को स्वयं को ऊपर उठाना चाहिए, स्वयं को नीचे नहीं गिराना चाहिए। मन ही मनुष्य का मित्र बन सकता है और वही उसका शत्रु भी बन सकता है।
आज की सीख
नकारात्मक सोच को अपना स्वभाव मत बनने दीजिए।
अपने मन को सही दिशा, अनुशासन और अच्छे विचारों से मजबूत कीजिए।
क्योंकि जीवन को बदलने की शुरुआत अक्सर परिस्थितियों से नहीं, अपने भीतर से होती है।
✍️ लेखक की बात
“अपने मन को जीत लिया, तो कई कठिन रास्ते भी आसान लगने लगते हैं।”
— Astrologer KN Tripathi
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Astrology is about tendencies, not verdicts.